Monday, April 10, 2023

हनुमान जी की अद्भुत भक्ति - Devotional Story

 हनुमान जी की अद्भुत भक्ति

जय श्री राम 

महायुद्ध समाप्त हो चुका था। जगत को त्रास देने वाला रावण अपने कुटुंब सहित नष्ट हो चुका था। कौशलाधीश राम के नेतृत्व में चहुँओर शांति थी।

राम का राज्याभिषेक हुआ। राजा राम ने सभी वानर और राक्षस मित्रों को ससम्मान विदा किया। अंगद को विदा करते समय राम रो पड़े थे। हनुमान को विदा करने की शक्ति तो श्रीराम में भी नहीं थी। माता सीता भी उन्हें पुत्रवत मानती थीं। हनुमान अयोध्या में ही रह गए।

राम दिन भर दरबार में, शासन व्यवस्था में व्यस्त रहे। संध्या जब शासकीय कार्यों से छूट मिली तो गुरु और माताओं का कुशलक्षेम पूछ अपने कक्ष में आए। हनुमान उनके पीछे-पीछे ही थे। राम के निजी कक्ष में उनके सारे अनुज अपनी-अपनी पत्नियों के साथ उपस्थित थे। वनवास, युद्ध, और फिर अंनत औपचारिकताओं के पश्चात यह प्रथम अवसर था जब पूरा परिवार एक साथ उपस्थित था। राम, सीता और लक्ष्मण को तो नहीं, कदाचित अन्य वधुओं को एक बाहरी, अर्थात हनुमान का वहाँ होना अनुचित प्रतीत हो रहा था। चूंकि शत्रुघ्न सबसे छोटे थे, अतः वे ही अपनी भाभियों और अपनी पत्नी की इच्छापूर्ति हेतु संकेतों में ही हनुमान को कक्ष से जाने के लिए कह रहे थे। पर आश्चर्य की बात कि हनुमान जैसा ज्ञाता भी यह मामूली संकेत समझने में असमर्थ हो रहा था।

अस्तु, उनकी उपस्थिति में ही बहुत देर तक सारे परिवार ने जी भर कर बातें कीं। फिर भरत को ध्यान आया कि भैया-भाभी को भी एकांत मिलना चाहिए। उर्मिला को देख उनके मन में हूक उठती थी। इस पतिव्रता को भी अपने पति का सानिध्य चाहिए। अतः उन्होंने राम से आज्ञा ली, और सबको जाकर विश्राम करने की सलाह दी। सब उठे और राम-जानकी का चरणस्पर्श कर जाने को हुए। परन्तु हनुमान वहीं बैठे रहे। उन्हें देख अन्य सभी उनके उठने की प्रतीक्षा करने लगे कि सब साथ ही निकले बाहर।

राम ने मुस्कुराते हुए हनुमान से कहा, "क्यों वीर, तुम भी जाओ। तनिक विश्राम कर लो।"

हनुमान बोले, "प्रभु, आप सम्मुख हैं, इससे अधिक विश्रामदायक भला कुछ हो सकता है? मैं तो आपको छोड़कर नहीं जाने वाला।"

शत्रुघ्न तनिक झुंझलाकर बोले, "परन्तु भैया को विश्राम की आवश्यकता है कपीश्वर! उन्हें एकांत चाहिए।"

"हाँ तो मैं कौन सा प्रभु के विश्राम में बाधा डालता हूँ। मैं तो यहाँ पैताने बैठा हूँ।"

"आपने कदाचित सुना नहीं। भैया को एकांत की आवश्यकता है।"

"पर माता सीता तो यहीं हैं। वे भी तो नहीं जा रही। फिर मुझे ही क्यों निकालना चाहते हैं आप?"

"भाभी को भैया के एकांत में भी साथ रहने का अधिकार प्राप्त है। क्या उनके माथे पर आपको सिंदूर नहीं दिखता?

हनुमान आश्चर्यचकित रह गए। प्रभु श्रीराम से बोले, "प्रभु, क्या यह सिंदूर लगाने से किसी को आपके निकट रहने का अधिकार प्राप्त हो जाता है?"

राम मुस्कुराते हुए बोले, "अवश्य। यह तो सनातन प्रथा है हनुमान।"

यह सुन हनुमान तनिक मायूस होते हुए उठे और 

राम-जानकी को प्रणाम कर बाहर चले गए।

प्रातः राजा राम का दरबार लगा था। साधारण औपचारिक कार्य हो रहे थे कि नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी न्याय मांगते दरबार में उपस्थित हुए। ज्ञात हुआ कि पूरी अयोध्या में रात भर व्यापारियों के भंडारों को तोड़-तोड़ कर हनुमान उत्पात मचाते रहे थे। राम ने यह सब सुना और सैनिकों को आदेश दिया कि हुनमान को राजसभा में उपस्थित किया जाए। रामाज्ञा का पालन करने सैनिक अभी निकले भी नहीं थे कि केसरिया रंग में रंगे-पुते हनुमान अपनी चौड़ी मुस्कान और हाथी जैसी मस्त चाल से चलते हुए सभा में उपस्थित हुए। उनका पूरा शरीर सिंदूर से पटा हुआ था। एक-एक पग धरने पर उनके शरीर से एक-एक सेर सिंदूर भूमि पर गिर जाता। उनकी चाल के साथ पीछे की ओर वायु के साथ सिंदूर उड़ता रहता।

राम के निकट आकर उन्होंने प्रणाम किया। अभी तक सन्न होकर देखती सभा, एकाएक जोर से हँसने लगी। अंततः बंदर ने बंदरों वाला ही काम किया। अपनी हँसी रोकते हुए सौमित्र लक्ष्मण बोले, "यह क्या किया कपिश्रेष्ठ? यह सिंदूर से स्नान क्यों? क्या यह आप वानरों की कोई प्रथा है?"

हनुमान प्रफुल्लित स्वर में बोले, "अरे नहीं भैया। यह तो आर्यों की प्रथा है। मुझे कल ही पता चला कि अगर एक चुटकी सिंदूर लगा लो तो प्रभु राम के निकट रहने का अधिकार मिल जाता है। तो मैंने सारी अयोध्या का सिंदूर लगा लिया। क्यों प्रभु, अब तो कोई मुझे आपसे दूर नहीं कर पाएगा न?"

सारी सभा हँस रही थी। और भरत हाथ जोड़े अश्रु बहा रहे थे। यह देख शत्रुघ्न बोले, "भैया, सब हँस रहे हैं और आप रो रहे हैं? क्या हुआ?"

भरत स्वयं को सम्भालते हुए बोले, "अनुज, तुम देख नहीं रहे! वानरों का एक श्रेष्ठ नेता, वानरराज का सबसे विद्वान मंत्री, कदाचित सम्पूर्ण मानवजाति का सर्वश्रेष्ठ वीर, सभी सिद्धियों, सभी निधियों का स्वामी, वेद पारंगत, शास्त्र मर्मज्ञ यह कपिश्रेष्ठ अपना सारा गर्व, सारा ज्ञान भूल कैसे रामभक्ति में लीन है। राम की निकटता प्राप्त करने की कैसी उत्कट इच्छा, जो यह स्वयं को भूल चुका है। ऐसी भक्ति का वरदान कदाचित ब्रह्मा भी किसी को न दे पाएं। मुझ भरत को राम का अनुज मान भले कोई याद कर ले, पर इस भक्त शिरोमणि हनुमान को संसार कभी भूल नहीं पाएगा। हनुमान को बारम्बार प्रणाम।"


Friday, April 7, 2023

हनुमान जी की पंचमुखी अवतार कथा - Devotional Story

हनुमान जी श्री राम के परम भक्त हैं। बल बुद्धि के धाम है। उन्हें संकट मोचन भी कहा जाता है।

लंका युद्ध के पश्चात् जब मेघनाद मारा गया तो रावण को अपने दो भाईयों अहिरावण और महिरावण से जो कि तंत्र विद्या के महाज्ञानी थे उनकी मदद मांगी।

दोनों भाई मां कामाक्षी के परम भक्त थे। रावण ने कहा कि अपने छल कपट से दोनों भाई राम लक्ष्मण का वध कर देना। जब वह सुबेल पर्वत पर पहुंचे तो दोनों भाईयों की सुरक्षा बहुत कड़ी थी इसलिए उन तक पहुंचना बहुत कठिन था । इस लिए वह माया से विभिषण का स्वरूप धारण कर उनकी कुटिया में पहुंच गया।

#श्रीराम जी महिमा देखिए कि दोनों राक्षस सो रहे #राम लक्ष्मण को शिला समेत उठा कर पालात लोक ले गए।

विभिषण जी को जब सारे घटनाक्रम का पता चला तो उन्होंने ने हनुमान जी को उनके पीछे भेजा। हनुमान जी ने पक्षी का रूप धारण कर लिया निकुंभला नगरी पहुंचे। वहां पर कबूतर कबूतरी आपस में बात कर रहे थे कि राम लक्ष्मण दोनों भाईयों की बलि देते ही रावण युद्ध में विजयी हो जाएगा।

इस तरह हनुमान जी को दोनों कबूतर कबूतरी की बातों से ज्ञात हो गया कि महिरावण और अहिरावण दोनों भाई श्री राम लक्ष्मण जी की बलि के लिए पाताल लोक ले गए हैं।

हनुमान जी को वहां प्रवेश द्वार पर एक अद्भुत पहरेदार दिखा जिसका आधा शरीर मानव का और आधा शरीर मछली का था। उसने हनुमान को द्वार पर रोका और कहने लगा कि मुझे हराये बिना तुम भीतर प्रवेश नहीं कर सकते।

हनुमान जी कहने लगे कि मैं अपने स्वामी श्री राम और उनके भाई लक्ष्मण को अहिरावण और महिरावण बलि देने वाले हैं। मैं उन्हें लेने आया हूं। मकरध्वज कहने लगा कि मैं भी अपने स्वामी अहिरावण के आदेश पर द्वार की सुरक्षा में खड़ा हूं इस लिए मैं आपको भीतर नहीं जाने दे सकता। तब हनुमान जी ने उसे युद्ध में हराया और हनुमान मकरध्वज को अपनी पूंछ में बांध कर भीतर प्रवेश कर गये।

हनुमान जी ने मां कामाक्षी को प्रणाम किया और प्रार्थना की क्या मां आप सचमुच श्री राम और लक्ष्मण जी की बलि देना चाहती है।

मां कहने लगी कि अहिरावण और महिरावण दोनों दैत्य अधर्मी और अत्याचारी है मैं उन दोनों दुष्टों की बलि चाहती हूं। मां ने हनुमान जी को बताया कि मंदिर में अहिरावण ने जो पांच दीपक जलाएं है अगर कोई सारे दीपक एक साथ बुझाएंगा उस समय उनका अंत होगा।

अहिरावण और महिरावण जब मंदिर में प्रवेश करने लगे तो हनुमान जी स्त्री के स्वर में बोले कि मैं कामाक्षी देवी चाहती हूं कि आज तुम दोनों मेरी पूजा झरोखे से करो।

पूजा के अंत में जब बलि देने के लिए श्री राम और लक्ष्मण जी बंधन में ही झरोखे से डाला गया तो दोनों ही निंद्रा में थे। हनुमान जी ने श्री राम और लक्ष्मण जी के बंधन मुक्त कर दिया।

अब मां को अहिरावण और महिरावण की बलि देना कर मां की इच्छा पूर्ति करना शेष था।

हनुमान जी दोनों राक्षसों से युद्ध करने लगे अहिरावण और महिरावण जब मरते तो पांच रूप में पुनः जीवित हो जाते। हनुमान जी को मां के वचन याद आए की जब मंदिर में जल रहे पांचों दीपक एक साथ बुझ जाएंगे तब इन दोनों का अंत होगा I

उत्तर दिशा में वराह मुख , दक्षिण में नरसिंह मुख , पश्चिम में गरूड़, पूर्व में वानर और आकाश की तरफ हयग्रीव मुख धारण कर श्री हनुमान जी ने अपने पांचों मुखों से एक साथ सभी दीपक बुझा दिये। अब हनुमान जी ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया।

उसके पश्चात हनुमान जी ने श्री राम और लक्ष्मण जी को चेतना में लाए।

Saturday, April 1, 2023

मैहर धाम - Maihar Dham

 Maihar Dham: चैत्र नवरात्रि में मैहर धाम में मां शारदा के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां के इस धाम में रोज चमत्कार होता है. जी हां...सुबह मंदिर के पट खोलने पर यहां मां की महिमा का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है.

सतना: मध्यप्रदेश के सतना जिला मुख्यालय से महज 35 किलोमीटर दूर मैहर मां शारदा देवी का मंदिर है, जहां नवरात्रि के 9 दिनों तक भक्तों का मेला लगता है. विश्व प्रसिद्ध मंदिर को देश में 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है. मैहर मां शारदा देवी विंध्य पर्वत श्रेणियों के मध्य त्रिकूट पर्वत पर विराजमान हैं. मान्यताओं के अनुसार, मां शारदा ने अपने परम भक्त आल्हा को अमरता का वरदान दिया था. मां शारदा के प्रथम भक्त आल्हा की महिमा भी अलौकिक है.

कहा जाता है कि आज भी मां की प्रथम पूजा आल्हा ही करते हैं. इतना ही नहीं, नवरात्रि के दिनों में आल्हा के द्वारा विशेष पूजा करने की भी बात प्रचलित है. बता दें कि मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है. इसके अलावा वर्तमान में रोप वे के माध्यम से भी श्रद्धालु मां के दरबार तक पहुंचते हैं. नवरात्रि में माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगता है. माता सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

पट खोलने पर रोज दिखता है चमत्कार…
मैहर मां शारदा देवी ने भक्त आल्हा को अमर होने का वरदान दिया है. ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर आल्हखंड के नायक आल्हा उदल दो सगे भाई थे. जो मां शारदा के अनन्य उपासक थे. आल्हा उदल ने ही सबसे पहले जंगल के बीच मां शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी. इसके बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 साल तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था. माता ने उन्हें प्रसन्न होकर अमर होने का वरदान दिया था. ऐसी मान्यता है कि आल्हा ब्रह्म मुहूर्त में मां की विशेष पूजा करते हैं, जिसका प्रमाण आज भी मां के पट खोलने पर सुबह मिलता है. कभी मां की प्रतिमा पर फूल, कभी श्रृंगार, कभी जल चढ़ा हुआ मिलता है.

आल्हा के दर्शन बिना अधूरी है यात्रा
मंदिर परिक्षेत्र में आल्हा देव के मंदिर के साथ आल्हा का अखाड़ा भी है. यहां आज भी भक्तों को उनकी अनुभूति होती है. आल्हा माता के परम भक्त माने जाते हैं. मैहर मां शारदा के मंदिर में जो भी भक्त पूजा अर्चना करने आते हैं, वह भक्त आल्हा की पूजा-अर्चना अवश्य करते हैं. कहते हैं कि आल्हा के दर्शन के बिना मां शारदा के दर्शन अधूरे हैं. मान्यता है कि यहां पर माता सती का हार गिरा था, जिसकी वजह से मैहर का नाम पहले मां का हार अर्थात माई का हार गिरने से माईहार हो गया, जो अपभ्रंश होकर मैहर नाम पड़ गया. इसलिए 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ मैहर मां शारदा देवी के मंदिर को माना जाता है. यहां आज भी माई के हार की अखंड ज्योति जल रही है.

प्रतिदिन होता है भव्य श्रृंगार
मैहर मां शारदा देवी का अद्भुत श्रृंगार किया जाता है, जिसमें सोमवार को माई का सफेद रंग के वस्त्र से श्रृंगार होता है. मंगलवार को नारंगी रंग के वस्त्र, बुधवार को हरे रंग के वस्त्र, गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र, शुक्रवार को नीले रंग के वस्त्र, शनिवार को काले रंग के वस्त्र और रविवार को लाल रंग के वस्त्र से माई का अद्भुत श्रृंगार किया जाता है.

लंका_दहन

 🔥लंका_दहन 🔥     जब रावण की लंका दहन की बात होती है तो सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है ! लेकिन इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं होगी...