Wednesday, March 22, 2023

नारायण नाम से स्वर्ग की प्राप्ति -Devotional Story

 नारायण नाम से स्वर्ग की प्राप्ति

प्राचीन काल में अजामिल नामक एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण था।

उसके पिता ने उसे बहुत अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए थे और वो भी सदैव अपने पिता की सेवा एवं ईश्वर की साधना में लगा रहता था। उसके पिता ऐसे आदर्श पुत्र को प्राप्त कर अपने आप को धन्य समझते थे।

समय आने पर उन्होंने अजामिल का विवाह एक सुन्दर एवं सुशील ब्राह्मण कन्या से कर दिया।

एक आदर्श पुत्र की भांति ही अजामिल एक आदर्श पति भी साबित हुआ और दोनों सुख पूर्वक रहने लगे।

एक बार अजामिल पूजा के लिए पुष्प लेने वन को गया। वापस आते समय उसने देखा कि एक व्यक्ति शराब के नशे में धुत्त एक अति सुन्दर वेश्या के साथ रमण कर रहा है।

अपने संस्कारों के कारण उसने बहुत प्रयास किया कि उस ओर ना देखे, किन्तु उस वेश्या के रूप ने उस पर ऐसा जादू किया कि वो चाह कर भी स्वयं को उस ओर देखने से रोक ना सका।

थोड़ी देर बाद जब वो घर वापस आया तो उसका मुख मलिन था। अजामिल उस स्त्री को अपने मन से निकाल नहीं पा रहा था। पूजा-पाठ, धर्म-कर्म इत्यादि में उसकी कोई रूचि ना रही।

अंततः एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण का वो पुत्र अपने ह्रदय से हार उस वेश्या के निवास पर जा पहुँचा।

बहुत दिनों तक उसने अपने सभी संस्कारों को भुला कर उस स्त्री के साथ भोग-विलास में लिप्त रहा। वो उसके रूप पर ऐसा मोहित हुआ कि उस वेश्या को वो अपने घर पर ले कर आ गया।

उसके पिता और स्त्री को उसके इस बदले रूप पर विश्वास नहीं हुआ। अजामिल ने धर्म से स्वयं को विमुख कर लिया और उस वेश्या के साथ सदैव भोग-विलास में लिप्त रहने लगा।

जब पानी सर से ऊपर चला गया तो उसके पिता ने उसे उसके कृत्य के लिए झिड़का और उसे आज्ञा दी कि वो तत्काल उस स्त्री को घर से निकाल दे।

किन्तु अजामिल ने उलट अपने पिता और अपनी नवविवाहिता पत्नी को धक्के दे कर उन्ही के घर से निकाल दिया।

अब तो वो और स्वछन्द रूप से भोग-विलास में रम गया।

उसके पास जो धन था वो सारा समाप्त हो गया किन्तु उस वेश्या की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए वो ब्राह्मण पुत्र चोरी, डकैती एवं हत्या जैसा जघन्य अपराध करने से भी ना चूका।

धीरे-धीरे वही उसका व्यवसाय बन गया। समय बीता और उस वेश्या से अजामिल को ९ पुत्र प्राप्त हुए और पुनः वो गर्भवती हुई।

अजामिल उस पूरे प्रदेश में अपने कुकर्मों के कारण कुख्यात हो गया।

एक बार ऋषियों का एक समूह उस गांव में आया। मार्ग में उन्होंने वहां के निवासियों से पूछा कि वो कहाँ रात्रि व्यतीत कर सकते हैं।

तब लोगों ने मजाक ही मजाक में उन्हें अजामिल के घर ये बोल कर भेज दिया कि वो बड़ा सच्चरित्र व्यक्ति है।

उसके वास्तविक कर्मों से अनभिज्ञ जब वे ऋषि अजामिल के घर पहुंचे तो वो लूट-पाट के लिए बाहर गया हुआ था।

उसकी अनुपस्थिति में उसकी गर्भवती स्त्री ने ऋषियों को भोजन कराया और कहा कि वो जल्द खाकर वहाँ से चले जाएँ अन्यथा यदि अजामिल वापस आ गया तो बहुत बिगड़ेगा।

अब ऋषियों को अजामिल की सच्चाई मालूम पड़ी, किन्तु उसका उद्धार करने के लिए उन्होंने कहा कि अब इतनी रात्रि वो कहाँ जायेंगे, इसलिए आज भर उन्हें वही रहने दिया जाये।

जब अजामिल वापस आया तो अपने घर पर ऋषियों का झुण्ड देख कर बहुत क्रोधित हुआ।

उसने उन सभी को मार कर वहां से भगाना चाहा किन्तु उसकी स्त्री ने उसे ये कह कर रोक दिया कि केवल एक ही रात की बात है इसीलिए उन्हें वही रहने दे।

उसकी बात मानकर अजामिल ने उन ऋषियों के एक रात अपने घर में रहने की आज्ञा दे दी।

अगले दिन सूर्योदय होते ही अजामिल ने सभी ऋषियों को वहां से जाने को कहा।

तब ऋषियों ने कहा कि क्या वो उन्हें कुछ दक्षिणा दे सकता है?

अब अजामिल तो खुद चोर ठहरा, उन्हें धन कहाँ से देता। उसने सीधे-सीधे बोल दिया कि उसके पास उन्हें दक्षिणा में देने के लिए कुछ नहीं है।

तब ऋषियों ने कहा कि दक्षिणा में उन्हें धन नहीं चाहिए, बस वो अपने होने वाले पुत्र का नाम नारायण रख दे।

अजामिल को लगा वो तो सस्ते में छूटा। उसे अपनी संतान का कुछ तो नाम रखना ही था, अब वो नारायण हो या कुछ और उससे क्या फर्क पड़ता है?

उन ऋषियों से छुटकारा पाने के लिए उसने उन्हें वचन दे दिया कि वो अपने होने वाली संतान का नाम नारायण ही रखेगा।

समय आने पर उसकी स्त्री ने १०वें पुत्र को जन्म दिया और वचन के अनुसार अजामिल ने उसका नाम नारायण रख दिया।

अब दैव योग से वो पुत्र अजामिल का सबसे प्रिय हो गया। समय का चक्र यूँ ही चलता रहा और अजामिल अपने पाप कर्म में लिप्त रहा।

समय बीता और अजामिल वृद्ध हो गया। जब उसका अंत समय आया तो अजामिल के कर्मों के अनुसार उसे नर्क में ले जाने के लिए भयानक यमदूत उसके सामने उपस्थित हुए।

मृत्युशैय्या में पड़ा अजामिल उन भयानक दूतों को देख कर भयभीत हो गया और जोर से अपने पुत्र को नारायण-नारायण कह पुकारने लगा।

जैसे ही यमदूतों ने अजामिल पर अपना पाश फेंका, उसी समय विष्णुदूत वहां पहुँचे और युद्ध कर उन यमदूतों से अजामिल को छुड़ाया।

इस पर यमदूतों ने उनसे पूछा कि वो उसे क्यों बचा रहे हैं?

अजामिल ने जीवन भर पाप के अतिरिक्त कुछ और किया ही नहीं है और इसके कर्मों के अनुसार यमराज की आज्ञा से वे उसे नर्क ले जाने आये हैं।

तब विष्णुदूतों ने कहा कि भले ही अजामिल ने जीवन भर पाप किया किन्तु अज्ञानतावश ही सही, उसने अपने अंत समय में श्रीहरि के नाम का स्मरण किया है, अतः वे किसी भी मूल्य पर उसे नर्क जाने नहीं दे सकते।

अब तो दोनों पक्षों में अपने-अपने तर्कों के आधार पर विवाद हो गया किन्तु विष्णुदूतों ने यमदूतों को उसे नर्क ले जाने नहीं दिया।

थक कर यमदूत यमराज के पास पहुंचे और उन्हें सारा वृतांत सुनाया।

तब यमराज ने हँसते हुए कहा कि विष्णु दूत सही कह रहे हैं।

चूंकि अजामिल ने अनजाने में ही सही, किन्तु भगवान विष्णु का नाम लिया है, उसे स्वतः ही एक वर्ष का जीवन और मिल गया है।

अब इस एक वर्ष के जीवन में उसके किये कर्म के अनुसार उसे स्वर्ग अथवा नर्क प्राप्त होगा।

उधर अजामिल ने जब ये देखा तो सोचने लगा कि यदि केवल एक बार श्रीहरि के नाम लेने का ये प्रभाव है तो क्या होता यदि वो जीवन भर उनकी भक्ति में रमा रहता?

उसे बहुत पश्चाताप हुआ और उसने अपने बचे हुए १ वर्ष में स्वयं को विष्णु भक्ति में लगा दिया।

वो सोते-जागते सदैव नारायण की ही भक्ति में ही डूबा रहता था।

१ वर्ष बाद जब उसकी आयु पूर्ण हुई तो यमदूत पुनः उसे लेने आये किन्तु इस बार उन्होंने बड़ी नम्रता से अजामिल को अपने साथ स्वर्ग चलने को कहा।

अंततः जीवन पर्यन्त केवल पाप कर्म करने वाला अजामिल केवल श्रीहरि के नाम का स्मरण करने के कारण स्वर्ग को प्राप्त हुआ।

ये कथा भागवत पुराण में दी गयी है जिससे हमें ये शिक्षा मिलती है कि भगवत भजन का क्या पुण्य प्राप्त होता है।



'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'☀️ Motivational Story


☀️'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'☀️ 

बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था.

चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था...

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा...

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा...

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...

वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं...

राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं।
हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ...चींटी ने चिड़िया से कहा, "चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली।

अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...

चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत राजा के पास कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो.मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!!

"निष्कर्ष....👨‍✈️

आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...

आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!

बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है.

पहले लोग मजाक उड़ाएंगे,फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे हम तो पहले से ही जानते थे की एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे!

रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा,
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..!

थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

गजेन्द्र मोक्ष कथा - A devotional Story

लंका_दहन

 🔥लंका_दहन 🔥     जब रावण की लंका दहन की बात होती है तो सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है ! लेकिन इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं होगी...