Tuesday, March 28, 2023

हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण

 
🌹हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण🌹

हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित वह रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी।

पवनपुत्र हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। वे स्वयं शास्त्रों के महान ज्ञाता और ज्ञानी हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि हनुमानजी ने स्वयं रामायण क्यों नहीं लिखी? श्रीराम की भक्ति से उनको अनेक सिद्धियां प्राप्त थीं। किसी ग्रंथ की रचना करना उनके लिए मुश्किल कार्य नहीं था।

यूं तो श्रीराम पर अनेक रामायण लिखी गई हैं, परंतु इनमें 2 सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। एक वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण और दूसरी तुलसीकृत रामचरित मानस। कहा जाता है कि सबसे पहले हनुमानजी ने ही रामायण लिखी थी लेकिन बाद में उन्होंने वह समुद्र में प्रवाहित कर दी थी। उन्होंने ऐसा क्यों किया? पढ़िए यह कथा..

हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित वह रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी। इसका नाम हनुमद रामायण था।

जब श्रीराम ने रावण सहित अनेक राक्षसों का अंत कर दिया और वे पुनः अयोध्या आ गए तब हनुमानजी हिमालय पर चले गए। वहां वे अपने नाखूनों से रामकथा रचते थे।  

इधर वाल्मीकि भी अपना ग्रंथ पूरा कर चुके थे। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि ये ग्रंथ भगवान शिव को अर्पित किया जाए। शिव को यह ग्रंथ भेंट करने के लिए वे कैलास पर्वत गए। वहां उन्होंने हनुमानजी द्वारा रची हुई रामायण देखी।

वाल्मीकि महान कवि थे लेकिन हनुमानजी की रचना देखकर तो वे भी चकित रह गए। एक योद्धा ऐसी सुंदर रचना कर सकता है, यह वाल्मीकि के लिए बहुत आश्चर्य की बात थी। उन्होंने हनुमानजी के काव्य की प्रशंसा की और बोले, आपकी रचना के सामने तो मेरा लेखन कुछ भी नहीं है।

यह सुनकर हनुमानजी ने सोचा, वाल्मीकि कवि हैं और श्रीराम के भक्त भी। उनका काव्य मेरी रचना जैसा सुंदर नहीं है तो क्या हुआ, उसमें है तो भगवान श्रीराम की महिमा! इसलिए मुझे ऐसा कार्य करना चाहिए कि उनकी रचना ही संसार में प्रसिद्ध हो।

इसके बाद हनुमानजी ने रामायण लिखी हुई वह शिला उठाई और उसे समुद्र में विसर्जित कर दी। इस प्रकार हनुमानजी द्वारा लिखी गई वह रामायण हमेशा के लिए सागर में समा गई।

वाल्मीकि के लिए हनुमानजी इतना बड़ा त्याग करेंगे, यह उन्होंने कभी सोचा नहीं था। वे हनुमानजी को प्रणाम कर बोले, हे रामदूत हनुमान, आप धन्य हैं। धन्य है आपका त्याग और रामभक्ति।

मैं आपके सामने नतमस्तक हूं और यह वचन देता हूं कि कलियुग में रामायण की रचना के लिए एक जन्म और लूंगा। कहते हैं कि वाल्मीकि की वह इच्छा श्रीराम ने पूर्ण की और वे कलियुग में तुलसीदास बनकर आए। 

🙏🙏🌹 सियावर रामचंद्र की जय पवनसुत हनुमान की जय🌹🙏🙏

Monday, March 27, 2023

Indian God's

 In Pics: This Is How Pretty Indian Gods In Dark Skin Can Look Through The Lens Of This Photographer.

Dark is beautiful of course but not when it comes to our gods. Our gods, that we worship and consider to be the beginning and end to our universe, are expected to be white as milk.

See, even till now, we have the notion that white or fair skin is better than dark skin, which is just further imposed by our very dear advertisement industry, with Fair and Lovely being one of the most popular face-cream brands in India.

Marriage ads have requirements for a ‘fair-skinned girl’; parlour staff, mothers and relatives still pester girls on how to lighten their skin, and India is still obsessed with white skin, but perhaps one area where not much attention is given is to how our gods are represented.

Most of the times, our Indian gods such as Lakshmi, Saraswati, Ganesh, are shown as quite light-skinned in pictures and idols, with a majority being female.

There are a few dark-skinned gods like Shiva, Krishna, Kali and such, but most of the times even their skin is lightened to show a slightly blue-ish colour instead of dark.

However, in a ground-breaking move, a Chennai-based photographer, Naresh Nil came out with a photo-series in December 2017, that reimagined Indian gods with a dark skin.

Creative director Bharadwaj Sundar worked with Naresh on this project.

The series was named ‘Dark Is Divine’ and from September 2017 till the next 2 months, they created about 7 portraits, each featuring a different god.

Sundar stated that the reason for doing this series was the widespread acceptance of Indian gods having light skin colour. After observing a photo in his house, the idea was formed and he added that, “Whether it’s temples within our own homes or the pictures of gods at a barber shop – they are all the same. All of them show gods who are fair.”

Nil on the other hand gave his reason for doing this series as, “Our idea was born out of this very notion of acceptance of fair as divine, which to me is more about normalisation of this concept in society.”

Apparently, it was not just the gods who had to be dark skinned, but the models portraying them also had to comfortable with their complexion.

Nil said that, “The most essential consideration was whether the models themselves were comfortable in presenting and associating themselves with the representation of their skin tone.”

The image of Lakshmi sitting in her iconic setting on a lotus is highlighted further when you see the dark colour of her skin. It contrasts a lot with how she is normally presented in other areas with light to almost white skin.

Model Suruthi Periyasamy was chosen to represent Goddess Lakshmi and she does full justice here.

Another reason to do this series was to increase relate-ability with our gods. Sundar said that, “Everyone here prefers fair skin. But I am a dark-skinned person and all my friends are dark-skinned too. So how do I identify with fair-skinned gods and goddesses?”

Krishna is canonically known to be dark skinned, in south India many of his idols are created from black coloured material, but even then his complexion is sidelined.

In many photographs and figures, he is often given blue coloured or sometimes fair skin which is not right perhaps.

This image is that of Bala Murugan, an avatar of Subramanya who is often depicted with flowing black hair and extremely light complexion.

Apparently, Naresh and Bhardwaj had planned to showcase 12 Gods and Goddesses, but due to time and budget constraints they could only do 6.

There were some people who felt that there was bias being shown by portraying Kali as dark-skinned, but even in that, there is not much wrong here.

Also, many of the poses, styles and visualisations of the images were inspired from that of Raja Ravi Verma’s portraits.

Naresh in reference to the use of Verma’s paintings said that, “Our focus was plain and simple, how are Gods or divinity presented in common culture, and by common we mean our immediate surroundings, whatever we come across in our everyday life.”

Instead of taking known models, the duo recruited unknown models who could match their requirements and give it a more real aesthetic.

Shiva who is depicted here, is known to have slightly dark skin, with him also being called ‘Neel Kanth’, but in family portraits with Parvati and Ganesh, his complexion is often changed to being lighter than it should be or made to look blue.

This image of Saraswati having dark skin was the most striking, since she is often portrayed as having completely milky-white skin.

Bhardwaj said that, “The ultimate victory for such a project would be if someone printed one of the photos and perhaps added it to their place of worship in their home and prayed to that god.”

This image of Sita with her sons Luv and Kusha was not initially going to be in the series.

But their make-up artist Sridevi Ramesh who created the looks of all the Gods and Goddesses in the photos requested that one more image be added and it was this one.

Aren’t you in love with these pictures already? Tell us your view in the comments below.

Thursday, March 23, 2023

बहाने V/S सफलता 🏆🏆🏆 Motivational Story

 😔😔😔 बहाने V/S सफलता 🏆🏆🏆 Motivational Story


1. मैं इतनी बार हार चुका , अब हिम्मत नही...!
अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।

3.मै अत्यंत गरीब घर से हूँ ...!
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे ।

4. मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला...!
उचित शिक्षा का अवसर भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को भी भारत मे नही मिला था..फिर उन्होंने अमेरिका में स्कालरशिप से पढ़ाई की

5.बचपन से ही अस्वस्थ था...!
आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।

6.मैने साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है...!
निरमा के मालिक करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचा और एम डी एच के ताउ ने टांगे पर मसाला बेचा और ज़िंदगी गुजारी ।

7.एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी...!
प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन को देख लो इनके पैर नकली है ।

8.मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है...!
थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।

9.बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था...!
प्रख्यात संगीतकार ए.आर.रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था।

10.मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी...!
लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।

11.मेरी लंबाई बहुत कम है...!
सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।

12.मै एक छोटी सी नौकरी करता हूँ ...!
इससे क्या होगा... धीरु अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे।पम्प पे तेल भरने की |

13.मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है , अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा...!
दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है ।

14.मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है , अब क्या कर पाउँगा...!
डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।

15.मेरी उम्र बहुत ज्यादा है....!
विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।
अभिताभ ने अपनी पहली फिलम 27 की उम्र में बनाई थी.

16.मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है...!
जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है ।

17.मेरे पास धन नही...!
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।

18.मुझे ढेरो बीमारियां है..!
वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो मे थे |
राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे।
स्टीफन हांकिंग को तो आप जानते ही होंगे।

आज आप जहाँ भी है या कल जहाँ भी होगे इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नही ठहरा सकते ,
हर कामयाब और नाकामयाब इंसान को बिल्कुल उतना ही समय मिलता है, 24 घंटे
ये डिपेंड करता है कि आप कैसे इन्हें खर्च करते हो.
इसलिए आज चुनाव करिये - सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने.!

Wednesday, March 22, 2023

नारायण नाम से स्वर्ग की प्राप्ति -Devotional Story

 नारायण नाम से स्वर्ग की प्राप्ति

प्राचीन काल में अजामिल नामक एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण था।

उसके पिता ने उसे बहुत अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए थे और वो भी सदैव अपने पिता की सेवा एवं ईश्वर की साधना में लगा रहता था। उसके पिता ऐसे आदर्श पुत्र को प्राप्त कर अपने आप को धन्य समझते थे।

समय आने पर उन्होंने अजामिल का विवाह एक सुन्दर एवं सुशील ब्राह्मण कन्या से कर दिया।

एक आदर्श पुत्र की भांति ही अजामिल एक आदर्श पति भी साबित हुआ और दोनों सुख पूर्वक रहने लगे।

एक बार अजामिल पूजा के लिए पुष्प लेने वन को गया। वापस आते समय उसने देखा कि एक व्यक्ति शराब के नशे में धुत्त एक अति सुन्दर वेश्या के साथ रमण कर रहा है।

अपने संस्कारों के कारण उसने बहुत प्रयास किया कि उस ओर ना देखे, किन्तु उस वेश्या के रूप ने उस पर ऐसा जादू किया कि वो चाह कर भी स्वयं को उस ओर देखने से रोक ना सका।

थोड़ी देर बाद जब वो घर वापस आया तो उसका मुख मलिन था। अजामिल उस स्त्री को अपने मन से निकाल नहीं पा रहा था। पूजा-पाठ, धर्म-कर्म इत्यादि में उसकी कोई रूचि ना रही।

अंततः एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण का वो पुत्र अपने ह्रदय से हार उस वेश्या के निवास पर जा पहुँचा।

बहुत दिनों तक उसने अपने सभी संस्कारों को भुला कर उस स्त्री के साथ भोग-विलास में लिप्त रहा। वो उसके रूप पर ऐसा मोहित हुआ कि उस वेश्या को वो अपने घर पर ले कर आ गया।

उसके पिता और स्त्री को उसके इस बदले रूप पर विश्वास नहीं हुआ। अजामिल ने धर्म से स्वयं को विमुख कर लिया और उस वेश्या के साथ सदैव भोग-विलास में लिप्त रहने लगा।

जब पानी सर से ऊपर चला गया तो उसके पिता ने उसे उसके कृत्य के लिए झिड़का और उसे आज्ञा दी कि वो तत्काल उस स्त्री को घर से निकाल दे।

किन्तु अजामिल ने उलट अपने पिता और अपनी नवविवाहिता पत्नी को धक्के दे कर उन्ही के घर से निकाल दिया।

अब तो वो और स्वछन्द रूप से भोग-विलास में रम गया।

उसके पास जो धन था वो सारा समाप्त हो गया किन्तु उस वेश्या की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए वो ब्राह्मण पुत्र चोरी, डकैती एवं हत्या जैसा जघन्य अपराध करने से भी ना चूका।

धीरे-धीरे वही उसका व्यवसाय बन गया। समय बीता और उस वेश्या से अजामिल को ९ पुत्र प्राप्त हुए और पुनः वो गर्भवती हुई।

अजामिल उस पूरे प्रदेश में अपने कुकर्मों के कारण कुख्यात हो गया।

एक बार ऋषियों का एक समूह उस गांव में आया। मार्ग में उन्होंने वहां के निवासियों से पूछा कि वो कहाँ रात्रि व्यतीत कर सकते हैं।

तब लोगों ने मजाक ही मजाक में उन्हें अजामिल के घर ये बोल कर भेज दिया कि वो बड़ा सच्चरित्र व्यक्ति है।

उसके वास्तविक कर्मों से अनभिज्ञ जब वे ऋषि अजामिल के घर पहुंचे तो वो लूट-पाट के लिए बाहर गया हुआ था।

उसकी अनुपस्थिति में उसकी गर्भवती स्त्री ने ऋषियों को भोजन कराया और कहा कि वो जल्द खाकर वहाँ से चले जाएँ अन्यथा यदि अजामिल वापस आ गया तो बहुत बिगड़ेगा।

अब ऋषियों को अजामिल की सच्चाई मालूम पड़ी, किन्तु उसका उद्धार करने के लिए उन्होंने कहा कि अब इतनी रात्रि वो कहाँ जायेंगे, इसलिए आज भर उन्हें वही रहने दिया जाये।

जब अजामिल वापस आया तो अपने घर पर ऋषियों का झुण्ड देख कर बहुत क्रोधित हुआ।

उसने उन सभी को मार कर वहां से भगाना चाहा किन्तु उसकी स्त्री ने उसे ये कह कर रोक दिया कि केवल एक ही रात की बात है इसीलिए उन्हें वही रहने दे।

उसकी बात मानकर अजामिल ने उन ऋषियों के एक रात अपने घर में रहने की आज्ञा दे दी।

अगले दिन सूर्योदय होते ही अजामिल ने सभी ऋषियों को वहां से जाने को कहा।

तब ऋषियों ने कहा कि क्या वो उन्हें कुछ दक्षिणा दे सकता है?

अब अजामिल तो खुद चोर ठहरा, उन्हें धन कहाँ से देता। उसने सीधे-सीधे बोल दिया कि उसके पास उन्हें दक्षिणा में देने के लिए कुछ नहीं है।

तब ऋषियों ने कहा कि दक्षिणा में उन्हें धन नहीं चाहिए, बस वो अपने होने वाले पुत्र का नाम नारायण रख दे।

अजामिल को लगा वो तो सस्ते में छूटा। उसे अपनी संतान का कुछ तो नाम रखना ही था, अब वो नारायण हो या कुछ और उससे क्या फर्क पड़ता है?

उन ऋषियों से छुटकारा पाने के लिए उसने उन्हें वचन दे दिया कि वो अपने होने वाली संतान का नाम नारायण ही रखेगा।

समय आने पर उसकी स्त्री ने १०वें पुत्र को जन्म दिया और वचन के अनुसार अजामिल ने उसका नाम नारायण रख दिया।

अब दैव योग से वो पुत्र अजामिल का सबसे प्रिय हो गया। समय का चक्र यूँ ही चलता रहा और अजामिल अपने पाप कर्म में लिप्त रहा।

समय बीता और अजामिल वृद्ध हो गया। जब उसका अंत समय आया तो अजामिल के कर्मों के अनुसार उसे नर्क में ले जाने के लिए भयानक यमदूत उसके सामने उपस्थित हुए।

मृत्युशैय्या में पड़ा अजामिल उन भयानक दूतों को देख कर भयभीत हो गया और जोर से अपने पुत्र को नारायण-नारायण कह पुकारने लगा।

जैसे ही यमदूतों ने अजामिल पर अपना पाश फेंका, उसी समय विष्णुदूत वहां पहुँचे और युद्ध कर उन यमदूतों से अजामिल को छुड़ाया।

इस पर यमदूतों ने उनसे पूछा कि वो उसे क्यों बचा रहे हैं?

अजामिल ने जीवन भर पाप के अतिरिक्त कुछ और किया ही नहीं है और इसके कर्मों के अनुसार यमराज की आज्ञा से वे उसे नर्क ले जाने आये हैं।

तब विष्णुदूतों ने कहा कि भले ही अजामिल ने जीवन भर पाप किया किन्तु अज्ञानतावश ही सही, उसने अपने अंत समय में श्रीहरि के नाम का स्मरण किया है, अतः वे किसी भी मूल्य पर उसे नर्क जाने नहीं दे सकते।

अब तो दोनों पक्षों में अपने-अपने तर्कों के आधार पर विवाद हो गया किन्तु विष्णुदूतों ने यमदूतों को उसे नर्क ले जाने नहीं दिया।

थक कर यमदूत यमराज के पास पहुंचे और उन्हें सारा वृतांत सुनाया।

तब यमराज ने हँसते हुए कहा कि विष्णु दूत सही कह रहे हैं।

चूंकि अजामिल ने अनजाने में ही सही, किन्तु भगवान विष्णु का नाम लिया है, उसे स्वतः ही एक वर्ष का जीवन और मिल गया है।

अब इस एक वर्ष के जीवन में उसके किये कर्म के अनुसार उसे स्वर्ग अथवा नर्क प्राप्त होगा।

उधर अजामिल ने जब ये देखा तो सोचने लगा कि यदि केवल एक बार श्रीहरि के नाम लेने का ये प्रभाव है तो क्या होता यदि वो जीवन भर उनकी भक्ति में रमा रहता?

उसे बहुत पश्चाताप हुआ और उसने अपने बचे हुए १ वर्ष में स्वयं को विष्णु भक्ति में लगा दिया।

वो सोते-जागते सदैव नारायण की ही भक्ति में ही डूबा रहता था।

१ वर्ष बाद जब उसकी आयु पूर्ण हुई तो यमदूत पुनः उसे लेने आये किन्तु इस बार उन्होंने बड़ी नम्रता से अजामिल को अपने साथ स्वर्ग चलने को कहा।

अंततः जीवन पर्यन्त केवल पाप कर्म करने वाला अजामिल केवल श्रीहरि के नाम का स्मरण करने के कारण स्वर्ग को प्राप्त हुआ।

ये कथा भागवत पुराण में दी गयी है जिससे हमें ये शिक्षा मिलती है कि भगवत भजन का क्या पुण्य प्राप्त होता है।



'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'☀️ Motivational Story


☀️'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'☀️ 

बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था.

चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था...

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा...

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा...

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...

वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं...

राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं।
हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ...चींटी ने चिड़िया से कहा, "चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली।

अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...

चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत राजा के पास कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो.मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!!

"निष्कर्ष....👨‍✈️

आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...

आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!

बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है.

पहले लोग मजाक उड़ाएंगे,फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे हम तो पहले से ही जानते थे की एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे!

रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा,
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..!

थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

गजेन्द्र मोक्ष कथा - A devotional Story

लंका_दहन

 🔥लंका_दहन 🔥     जब रावण की लंका दहन की बात होती है तो सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है ! लेकिन इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं होगी...