Thursday, February 23, 2023

सोमनाथ मंदिर के रहस्य

 पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग है सोमनाथ, जानें इससे जुड़े 5 रोचक तथ्य


सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था.

12 में से सबसे पहले ज्योतिर्लिंग कहे जाने वाले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में कई रोचक तथ्य पढ़ने को मिलते हैं, जिसके बारे सभी को जानना चाहिए. सोमनाथ मंदिर सौराष्ट्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है. आइए जानते हैं इसका इतिहास और अन्य बातें.

हाइलाइट्स

भारतवर्ष में भगवान शिव के 12 तीर्थ स्थल हैं, जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है.

सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव के बड़ी संख्या में भक्त हैं, जो उन्हें प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते रहते हैं. भारतवर्ष में भगवान शिव के 12 तीर्थ स्थल है जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है. 12 ज्योतिर्लिंग के विषय में रोचक तथ्य से जुड़ी एक सीरीज चलाई जा रही है, जिसमें अभी तक हम बात कर चुके हैं मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के महाकाल ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में. आज की इस कड़ी में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं पृथ्वी के सबसे पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के बारे में.

1. मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख ऋग्वेद में भी पढ़ने को मिलता है. भोलेनाथ का यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान और पतन का प्रतीक भी माना जाता है.

2. भगवान शिव के इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई 150 फीट है. जिस पर 10 टन वजनी कलश रखा है. सोमनाथ मंदिर की ध्वजा 27 फीट की है.

3. सोमनाथ मंदिर को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहला गर्भ ग्रह, दूसरा सभामंडप, तीसरा नृत्य मंडप. इस परिसर के ऊपरी भाग में शिवलिंग के ऊपर अहिल्येश्वर की प्रतिमा है. इसके अलावा यहां भगवान गणेश का मंदिर है, जिसके बाहर की तरफ उत्तरी भाग में अघोरलिंग की मूर्ति है. इस परिसर में देवी पार्वती, देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी, माता गंगा और नंदी की मूर्तियां स्थापित हैं.

4. मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने सोमनाथ में ही अपने शरीर का त्याग किया था. सोमनाथ मंदिर सुबह 6 बजे से रात में 9 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है. इस दौरान भगवान शिव की एक दिन में तीन बार आरती की जाती है. पहली आरती सुबह 7 बजे, दूसरी आरती दोपहर 12 बजे और तीसरी आरती शाम 7 बजे की जाती है.

5. प्रभावनगर द्वार के पास एक गौरीकुंड सरोवर है, जिसके पास एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. इसी प्रकार भावनगर में भगवान विष्णु, माता काली और भगवान गणेश के भव्य मंदिर बने हुए हैं.

जय श्री महाकाल।।🙏🏼🙏🏼🙏🏼

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अपनी_क्षमता_पहचानना_आवशयक

 अपनी_क्षमता_पहचानना_आवशयक है! 

एक गाँव में एक #आलसी आदमी रहता था, वह कुछ काम-धाम नहीं करता था।बस दिन भर #निठल्ला बैठकर सोचता रहता था कि किसी तरह कुछ खाने को मिल जाए।एक दिन वह यूं ही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया। वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे।रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और #आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा, बाग़ का #मालिक वहाँ आ पहुँचा।

बाग़ के मालिक को देख आलसी आदमी डर गया और जैसे-तैसे पेड़ से उतरकर वहाँ से #भाग खड़ा हुआ।भागते-भागते वह गाँव में बाहर स्थित जंगल में जा पहुँचा, वह बुरी तरह से थक गया था। इसलिए एक पेड़ के नीचे बैठकर सुस्ताने लगा।तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी (Fox) पर पड़ी, उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी।लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ?

जिज्ञासा में वह  एक पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ बैठकर देखने लगा कि अब इस लोमड़ी के साथ आगे क्या होगा?कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर (Lion) की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा, जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर भागने लगे, लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी, वह वहीं खड़ी रही।शेर लोमड़ी के पास आने लगा, आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा,लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था।

#शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया,उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था, जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया।

लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी, थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया।

यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि #भगवान सच में #सर्वेसर्वा है,उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का  प्रबंध कर रखा है, वह अपने घर लौट आया।घर आकर वह २-३ दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था, वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी। आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा। घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े। वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है, लेकिन इंसानों के लिए नहीं।

बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है,भगवान के पास सारे प्रबंध है। दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी, लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें #लोमड़ी नहीं #शेर बनाना चाहते हैं।

#कहानी_में_निहित_शिक्षा

हम सबके भीतर क्षमताओं का असीम भंडार है,बस अपनी अज्ञानतावश हम उन्हें पहचान नहीं पाते और स्वयं को कमतर समझकर दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा करते रहते हैं।स्वयं की क्षमता पहचानिए। दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा मत करिए।इतने सक्षम बनिए कि आप दूसरों की सहायता कर सकें।



💐ॐ नमो नारायण💐

 💎ॐ श्री विष्णुवे नमः💎

🌸ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌸

💮हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा💮

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग: यहां ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मिलती है मुक्ति, जानें रोचक तथ्य

 रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग: यहां ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मिलती है मुक्ति, जानें रोचक तथ्य

मंदिर के अंदर सभी कुएं भगवान राम ने अपने बाणों से बनाए थे.

भारत में जिस तरह काशी का महत्व उत्तर भारत में है, उसी प्रकार दक्षिण भारत में रामेश्वरम का महत्व है. रामेश्वरम हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों तरफ से घिरा हुआ एक शंख आकार का द्वीप है. आज हम जानेंगे रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में.

हाइलाइट्स

भगवान राम के नाम से ही इस जगह का नाम रामेश्वरम द्वीप और मंदिर का नाम रामेश्वरम पड़ा.

रामेश्वरम मंदिर का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है.

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

भारत एक ऐसा देश है जहां कई तरह के ऐतिहासिक स्थल देखे जा सकते हैं और इन सभी का इतिहास में अपना अलग महत्व है. भारत में हजारों साल पुराने कई मंदिर स्थापित हैं, इसी क्रम में सबसे लुभावने और दर्शनार्थियों से भरे हुए मंदिरों में से एक है रामेश्वरम मंदिर. रामेश्वरम मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जिसे भगवान शिव के सम्मान में बनाया गया है. ये मंदिर तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. इसे एक पवित्र स्थल और चार धामों में से एक माना गया है. इस मंदिर को स्थानीय भाषा में रामनाथ स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस विषय में बता रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

रामेश्वरम मंदिर का इतिहास
मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय की कामना से लंका जाने से पहले भगवान शिव की पूजा करना चाहते थे. तब उन्होंने इस जगह पर महादेव के शिवलिंग की स्थापना कर इसकी पूजा अर्चना की थी. भगवान राम के नाम से ही इस जगह का नाम रामेश्वरम द्वीप और मंदिर का नाम रामेश्वरम पड़ा. पुराणों के अनुसार, रावण एक ब्राह्मण था और ब्राह्मण को मारने के दोष को खत्म करने के लिए भगवान राम भगवान शिव की पूजा करना चाहते थे, लेकिन तब इस द्वीप पर कोई मंदिर नहीं था, इसलिए हनुमान जी को कैलाश पर्वत से भगवान शिव के शिवलिंग लाने के लिए कहा गया. जब हनुमान जी समय पर शिवलिंग लेकर नहीं पहुंच पाए, तब माता सीता ने समुद्र की रेत को मुट्ठी में उठाकर शिवलिंग का निर्माण किया और इसी शिवलिंग की भगवान राम ने पूजा की. हनुमान जी के द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी यहीं पर स्थापित कर दिया गया.

रामेश्वरम मंदिर के बारे में रोचक तथ्य
1. रामेश्वरम मंदिर लगभग 1000 फुट लंबा और 650 फुट चौड़ा है. इस मंदिर में 40 फुट ऊंचे दो पत्थर इतनी बराबरी के साथ लगाए गए हैं कि इनको देखकर आश्चर्य होना स्वभाविक है. मान्यताओं के अनुसार, रामेश्वर मंदिर निर्माण में लगाए हुए पत्थरों को श्रीलंका से नावों के जरिए लाया गया था.

2. रामेश्वरम मंदिर का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है. यह उत्तर से दक्षिण में 197 मीटर और पूर्व पश्चिम में 133 मीटर लंबा है. इस गलियारे के परकोटे की चौड़ाई 6 मीटर और ऊंचाई 9 मीटर है. मंदिर में प्रवेश द्वार 38.4 मीटर ऊंचा है. यह मंदिर लगभग 6 हेक्टेयर में बना हुआ है.

3. रामेश्वरम में प्रचलित किवदंतियों की मानें तो इस मंदिर के अंदर सभी कुएं भगवान राम ने अपने बाणों से बनाए थे. ऐसा माना जाता है कि इनमें कई तीर्थ स्थलों का जल मिलाया गया था.

4. भगवान राम ने ब्राह्मण हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना कर उसकी पूजा की थी, इसलिए माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग की विधि-विधान से पूजा करने से ब्रम्ह हत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है. जो व्यक्ति यहां स्थित भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर पूरी श्रद्धा से गंगाजल चढ़ाता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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