पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग है सोमनाथ, जानें इससे जुड़े 5 रोचक तथ्य
सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था.
12 में से सबसे पहले ज्योतिर्लिंग कहे जाने वाले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में कई रोचक तथ्य पढ़ने को मिलते हैं, जिसके बारे सभी को जानना चाहिए. सोमनाथ मंदिर सौराष्ट्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है. आइए जानते हैं इसका इतिहास और अन्य बातें.
हाइलाइट्स
भारतवर्ष में भगवान शिव के 12 तीर्थ स्थल हैं, जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है.
सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था.
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
भगवान शिव के बड़ी संख्या में भक्त हैं, जो उन्हें प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते रहते हैं. भारतवर्ष में भगवान शिव के 12 तीर्थ स्थल है जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है. 12 ज्योतिर्लिंग के विषय में रोचक तथ्य से जुड़ी एक सीरीज चलाई जा रही है, जिसमें अभी तक हम बात कर चुके हैं मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के महाकाल ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में. आज की इस कड़ी में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं पृथ्वी के सबसे पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के बारे में.
1. मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने करवाया था. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख ऋग्वेद में भी पढ़ने को मिलता है. भोलेनाथ का यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान और पतन का प्रतीक भी माना जाता है.
2. भगवान शिव के इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई 150 फीट है. जिस पर 10 टन वजनी कलश रखा है. सोमनाथ मंदिर की ध्वजा 27 फीट की है.
3. सोमनाथ मंदिर को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहला गर्भ ग्रह, दूसरा सभामंडप, तीसरा नृत्य मंडप. इस परिसर के ऊपरी भाग में शिवलिंग के ऊपर अहिल्येश्वर की प्रतिमा है. इसके अलावा यहां भगवान गणेश का मंदिर है, जिसके बाहर की तरफ उत्तरी भाग में अघोरलिंग की मूर्ति है. इस परिसर में देवी पार्वती, देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी, माता गंगा और नंदी की मूर्तियां स्थापित हैं.
4. मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने सोमनाथ में ही अपने शरीर का त्याग किया था. सोमनाथ मंदिर सुबह 6 बजे से रात में 9 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है. इस दौरान भगवान शिव की एक दिन में तीन बार आरती की जाती है. पहली आरती सुबह 7 बजे, दूसरी आरती दोपहर 12 बजे और तीसरी आरती शाम 7 बजे की जाती है.
5. प्रभावनगर द्वार के पास एक गौरीकुंड सरोवर है, जिसके पास एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. इसी प्रकार भावनगर में भगवान विष्णु, माता काली और भगवान गणेश के भव्य मंदिर बने हुए हैं.
जय श्री महाकाल।।🙏🏼🙏🏼🙏🏼
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जय भोलेनाथ।।🙏🏼🙏🏼🙏🏼
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