श्री हनुमान जी के बल का वर्णन ।
वैसे तो हनुमान जी के बल का वर्णन मुख से नहीं किया जा सकता लेकिन हनुमान चालीसा कि यह लाइन श्री हनुमान जी के बल का वर्णन करती है
रामदूत अतुलित बल धामा
इस लाइन का अर्थ है कि हनुमानजी अतुलित बल अर्थात जिस बल का कोई सीमा नहीं है , अतुल्य बल के हनुमानजी स्वामी है
समुंद्र पार करते समय जब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्तियां याद दिलाई थी तब जिस पर्वत से हनुमान जी ने लंका जाने के लिए छलांग लगाई वह पर्वत हनुमान जी के बल से पाताल लोक में धस गया।
एक बार रावण वह हनुमान जी ने एक-एक मुक्के का युद्ध हुआ जिसमें यह शर्त रखी गई कि जिस के मुक्के में ज्यादा शक्ति होगी वह जीत जाएगा युद्ध शुरू हुआ हनुमान जी ने कहा पहले आप मारे तब रावण ने कहा नहीं पहले तुम मारो इस पर हनुमान जी ने कहा नहीं पहले आप मारे कहीं फिर आप अपनी बारी के लिए बचे ही ना तब रावण ने जोर से मुक्का बनाया और हनुमान जी की छाती पर मारा जिस पर हनुमान जी को कुछ भी नहीं हुआ व रावण को जोर से पीछे झटका लगा अब श्री हनुमान जी की बारी आई तो उन्होंने पूरी जोर से मुक्का बनाया और घुमा के जैसे ही मारने वाले थे वैसे ही ब्रह्मा जी आप वहां प्रकट हो गए और हनुमान जी को उन्होंने रोक लिया तब ब्रह्मा जी ने कहा की हनुमान जी आप इतना जोर से ना मारे वरना यह रावण यही मर जाएगा और यह युद्ध यहीं समाप्त हो जाएगा तब हनुमान जी ने बहुत थोड़ा सा बल लगा कर रावण को मारा उस पर भी रावण कई हफ्तों तक बिस्तर से नहीं उठा इस पर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हनुमानजी के अंदर कितना बल है और ऐसे बहुत सारे प्रसंग हैं जिनसे हनुमान जी के बल का हमें थोड़ा बहुत पता चलता है।
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