Tuesday, February 7, 2023

लोग विचार कम करते है प्रचार में अधिक विश्वास करते हैं

लोग विचार कम करते है प्रचार में अधिक विश्वास करते हैं

लोग विचार कम करते है प्रचार में अधिक विश्वास करते हैं ये दुखद है........

ढोल गवार शूद्र पशु नारी ये शब्द न तो श्री राम जी ने कहे है और न ही तुलसीदास जी ने

ये लाइन समुद्रदेव की है , पूरी चौपाई इस प्रकार है..!

समुद्रदेव कहते है...

प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥

ढोल गवाँर शुद्र पशु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥

अर्थात , अच्छा किया प्रभु जो अपने हमे सीख दी , पर हमारी मर्यादा भी तो अपने ही बनाई है ढोल गवाँर शूद्र पशु नारी शिक्षा के अधिकारी है

ढोल (एक वाद्य ), गंवार(मूर्ख), शूद्र (कर्मचारी), पशु (चाहे जंगली हो या पालतू) और नारी (स्त्री/पत्नी),

इन सब को साधना अथवा सिखाना पड़ता है, और निर्देशित करना पड़ता है

तथा विशेष ध्यान रखना पड़ता है ॥

ताड़ने का अर्थ पीटना तो बिल्कुल नहीं होता है , जैसा आज भ्रम उत्पन्न अलग बांटने की कोशिश की जा रही है

अगर पीटना होता तो तुलसीदास उसी रामचरित मानस मे ये नहीं लिखते..!

जय गुरुदेव

सादर जय सियाराम

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