Thursday, March 16, 2023

मैले कपड़े !!* Motivational Story

!! मैले कपड़े !!

एक दिन की बात है। एक मास्टर जी अपने एक अनुयायी के साथ प्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया और उन्हें भला-बुरा कहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे, पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देख अंततः वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया।

उस व्यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आश्चर्य से पुछा, “मास्टर जी आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया और तो और आप मुस्कुराते रहे, क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्ट नहीं पहुंचा ?”

मास्टर जी कुछ नहीं बोले और उसे अपने पीछे आने का इशारा किया।

कुछ देर चलने के बाद वे मास्टर जी के कक्ष तक पहुँच गए। मास्टर जी बोले, “तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभी आया।”

मास्टर जी कुछ देर बाद एक मैले कपड़े को लेकर बाहर आये और उसे अनुयायी को थमाते हुए बोले, “लो अपने कपड़े उतारकर इन्हें धारण कर लो ?”

कपड़ों से अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी और अनुयायी ने उन्हें हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया।

मास्टर जी बोले, “क्या हुआ तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण कर सकते ना ? ठीक इसी तरह मैं भी उस व्यक्ति द्वारा फेंके हुए अपशब्दों को नहीं ग्रहण कर सकता।

*शिक्षा:-*

इतना याद रखो कि यदि तुम किसी के बिना मतलब भला-बुरा कहने पर स्वयं भी क्रोधित हो जाते हो तो इसका अर्थ है कि तुम अपने साफ़-सुथरे वस्त्रों की जगह उसके फेंके फटे-पुराने मैले कपड़ों को धारण कर रहे हो।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*

*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

Wednesday, March 15, 2023

एकता -Motivational Story

*!!  एकता  !!*

किसी जंगल में एक शेर रहता था जिससे सभी पशु-पक्षी बहुत डरते थे। शेर रोज किसी एक जानवर को मार कर अपना पेट भरता था। उसी जंगल में खरगोश, कछुआ, बंदर और हिरण, ये चारों पक्के और सच्चे दोस्त थे, जो हमेशा हर जानवर की मदद करने को तैयार रहते थे।

एक दिन एक भेड़िया उस जंगल में पहुंचा। रास्ते में उसे भालू मिला। भालू ने उसको जंगल के सारे कायदे कानून बताए कि यहां का राजा शेर रोज एक जानवर को मारकर खाता है, उससे बच कर रहना। चालाक भेड़िये ने सोचा, शेर से मित्रता करके उसका हितैषी बनकर, उसका दिल जीतना चाहिए, इससे मेरी जान तो बच जाएगी। 

भेड़िया शेर की गुफा में गया और सोए हुए शेर के पास बैठ गया। शेर नींद से जब जागा तो भेड़िए को खाने को उद्यत हुआ। भेड़िए ने कहा, महाराज, पशुलोक से पशु देवता ने आपकी सेवा के लिए मुझे भेजा है। अब आपको शिकार पर जाने की जरूरत नहीं। आज से आपको मैं शिकार लाकर दूंगा। शेर ने भेड़िए की बात मान ली।

भेड़िए ने जंगल में यह ढिंढोरा पिटवाया कि मैं पशुलोक से राजा शेर का सेवक बन कर आया हूं। प्रतिदिन जंगल के राजा की भूख मिटाने के लिए एक प्राणी मेरे साथ चलेगा। जंगल के सभी जानवर डर गए और भेड़िए की बात मानने को तैयार हो गए।

शेर के पास जाने के क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आई और भेड़िया उसे ले जाने लगा। तभी वहां हिरण, बंदर और कछुआ भी आ पहुंचे और उसके साथ जाने की जिद करने लगे। शेर के सामने पहुंचकर चारों ने बारी-बारी अपनी बात शेर से कहीं। सबसे पहले खरगोश बोला, महाराज आज मैं आपका भोजन हूं। कछुआ बोला, नहीं महाराज आप अकेले खरगोश को नहीं खाइए, मुझे भी खाइए। तभी बंदर कहता है, महाराज इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं बड़ा हूं, मुझे अपना भोजन बना लीजिए। इतने में हिरण बोल पड़ा, महाराज, इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं अकेला ही तीनों के बराबर हूं, आप मुझे अपना शिकार बना लीजिए। 

भेड़िया यह सब सुन रहा था। उसने कहा, महाराज, देर ना करें इन चारों की बातों में ना आए, एक झटके में इनको खत्म करके अपनी भूख मिटायें। तभी शेर ने चारों को अपने पास बुलाया और कहा, मैं तुम्हारी सच्ची एकता, मित्रता और त्याग देख कर बहुत खुश हुआ। यह कह कर शेर ने भेड़िए को अपना शिकार बना दिया।

*शिक्षा:-*

किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए आपसी एकता होना बहुत जरूरी है। एकता के लिए चाहिए आपसी स्नेह और विश्वास। स्नेह के आधार से ही सहयोगी बन पाते हैं। सहयोगी बनने के लिए अपने को मिटाना पड़ता है अर्थात् अपने पुराने संस्कारों को मिटाना होता है। इसलिए आप हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करते रहो..!!

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*

*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

Tuesday, March 14, 2023

गीता का ज्ञान- Devotional Story

 

गीता का ज्ञान

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता प्रभु कह रहे हैं कि अर्जुन तू सर्व भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से परम शांति एवं सनातन परमधाम को प्राप्त होगा। वह परमात्मा कौन है। वह परमात्मा कबीर देव हैं ?

नहीं वो परमात्मा संत कबीर तो बिल्कुल नहीं हैं। श्री कृष्ण स्वयं ही परमात्मा है। आपने अगर कभी किसी अभिनेता का इंटरव्यू देखा हो तो कई बार जो एक्टर होता है वो अपनी फिल्म की बात करते समय अपने character की बात करता है। अगर कोई एक्टर बोले कि फिल्म का हीरो ऊँची छलांग लगेगा या वो ये बोले कि फिल्म में मैं ऊँची छलांग लगूँगा, ये एक ही बात है।

उसी प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण कहें कि मेरी शरण में आ या कहे कि उस परमात्मा की शरण में जा वो एक ही बात है, कोई अंतर नहीं है। गीता में कृष्ण ने अर्जुन से कई बार कहा है कि मेरी शरण में आ। गीता का ज्ञान देने वाले परमात्मा हरि हैं, जब हरि स्वयं अर्जुन के सारथी बनकर उन्हें गीता का ज्ञान देते हैं तो वहाँ कोई उनके शरीर में आकर गीता नहीं सुनाता, गीता में जो नारायण बोलते हैं, वे स्वयं ही बोलते हैं। और उन्होंने कई बार गीता में कहा कि मैं वासुदेव स्वयं परमात्मा हूँ।

तो सवाल ही नहीं उठता कि भगवद्गीता में कबीर को परमात्मा कहा गया हो, परमात्मा मुख्य रूप से 5 रूपों में विराजमान हैं, उनमें से एक नारायण हैं, इसलिए श्री कृष्ण ही वो परमात्मा हैं जिन्होंने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया और उनका सनातन परमधाम वैकुंठ है।

तो जी नहीं, परमात्मा कबीर नहीं हैं, कृष्ण हैं

कृष्णस्तु भगवान स्वयं 🙏🏼🙏🏼🙏🏼

लंका_दहन

 🔥लंका_दहन 🔥     जब रावण की लंका दहन की बात होती है तो सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है ! लेकिन इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं होगी...